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अक्स था मेरा अमन साहित्य का वह नूर था / अवधेश्वर प्रसाद सिंह

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अक्स था मेरा अमन साहित्य का वह नूर था।
शब्द की जादूगरी में भी बहुत मशहूर था।।

या खुदा ये क्या किया तू छीन कर क्यों ले गया।
मौत से वह लड़ रहा था क्यों वहाँ से दूर था।।

हाल ऐसा ही रहा तो कौन पूजेगा तुझे।
आ गया जो काल बनकर वह बहुत ही क्रूर था।।

मन्नतंे मांगी ग़ज़लगो तू सुना फिर भी नहीं।।
कौन गायेगा ग़ज़ल वह गायिकी में सूर था।।

दीप क्यों आकर बुझाया रात बाकी थी अभी।
चोर माफिक ले गया तेरा यही दस्तूर था।।