भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अचाणचक कीं दिख जावै / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अचाणचक कीं दिख जावै
कांई ठा कुण लिख जावै

नित चालै लुक-मींचनी
सांमै आवै छिप जावै

गाडै में छाजलो भार
मन मानै तो धिक जावै

औ सौदो सुणो प्रीत रो
बिना मोल मन बिक जावै

मिजळी ओळूं रो कांई
आवै तो आ नित आवै