भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अठन्नी / संतोष अलेक्स

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सब्ज़ी वाले ने जो चिल्लर लौटाई
एक अठन्नी भी थी उसमें

वैसी ही अठन्नी
जैसी अम्मा ने दी थी मुझे
विष्णु पर चढ़ाने को

मुझे याद आया कि
उस अठन्नी को लेकर भागा था मैं
खरीदने मिठाई

आज अठन्नी कोई नहीं लेता
भिखारी भी
कैमिस्ट भी लौटाते हैं अठन्नी की जगह
बस, एक टॉफ़ी

नहीं, अब मैं इसे कहीं खर्च नहीं करूँगा
अठन्नी की असली कीमत जानता हूँ मैं

अनुवाद : अनिल जनविजय