भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अन्धकार का बबूल / महेश उपाध्याय

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आस-पास झर गया
गुड़हल का फूल
बींध गया देह
अन्धकार का बबूल

एक भीड़ सन्नाटा
गन्धहीन मन
पानी का डूबा-सा
लग रहा बदन

आँखों में कसक रही
धूल सिर्फ़ धूल ।