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अन्न भंगी का करके खाया मेरी माफ करो गलती / मेहर सिंह

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वार्ता- जब राजा को कालिया के यहां काम करते कुछ समय व्यतीत हो जाता है तो वे कमजोर हो गया था क्योंकि 27 दिन तक उसने भंगी का अन्न पानी समझकर कुछ नहीं खाया था। आखिरकार उसने मजबूर होकर खाना पड़ता है और क्या कहता है-

हे ईश्वर तेरी न्यारी माया कोन्या भेद किसै नै पाया।
अन्न भंगी का करके खाया मेरी माफ करो गलती।टेक

मेरी किस्मत मुझ तैं रूठी
बेरा ना कद लगै मर्ज कै बुट्टी
झूठी है सब दुनियादारी,
किसका लड़का किसकी नारी,
लागी भूल मनुष्य कै भारी या तृष्णा चित छलती।

जिसकी बात बिगड़ज्या बणकै
वो तो फेर रोवै सै सिरधुन कै
सुणकै क्रोध बदन मैं जागै
ओहे जाणै जिसकै लागै
किस्मत की रेख कै आगै, मेरी पेश नहीं चलती।

मेरी फूट गई तकदीर
मेरै लगे विपत के तीर
शूरवीर था अकलबन्द चातर
आज रहग्या मामूली जाथर,
होणी बणै होण की खातर या टाली ना टलती।

मेहरसिंह मनै आकै भेद बतावै
ना तो मेरा हिया उफण कै आवै
भेद ना पावै चलै चतराई
बख्त पड़े पै बाहण ना भाई
घड़ा ठुवावण तैं नाटी ब्याही, मेरी न्यूं काया जलती।