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अपणी पिस्तौल सिर अपणा जीन्ते / रणवीर सिंह दहिया

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अपणी पिस्तौल सिर अपणा जीन्ते जी काबू कोन्या आया॥
मरे मरे पै गोली दागी इतना डर था पुलिस पै छाया॥

अलपै्रफड पाकै मैं आहमी साहमी दनादन गोली चाली
पुलिसिये कई जणे थे ऐकले नै कमान सम्भाली
निशाना गया नहीं खाली अंग्रेज अफसर घबराया॥
यूनिवर्सिटी के छात्रा उड़ै इकट्ठे हुये इतनी वार मैं
खबर मौत की एक दम फैली सारे ही बाजार मैं
पार्क के भीतर बाहर मैं कप्तान पुलिस का लखाया॥
देख भीड़ पार्क के म्हां पुलिस नै गोली चलानी चाही
कलैक्टर हालात समझग्या गोली की करी मनाही
पुलिस बदलगी अपणी राही बिना गोली काम चलाया॥
इलाहाबाद पूरा बन्द होग्या हड़ताल हुई थी भारी
पान खोमचे आले शामिल थे अर तांगे की सवारी
रणबीर कठ्ठी जनता सारी नारा इन्कलाब का लाया॥