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अपणे हाथां क्यू ना गेर दी कुऐं कै म्हां ठा कै / मेहर सिंह

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वार्ता- सज्जनों अंजना को जब उसकी सास महल से निकाल देती है तो वह अपने मायके जाती है तथा अपनी मां को व्यथा कथा सुनाती है-

आख्यां कै म्हां पाणी आया धोरै पहुंची मां कै।
अपणे हाथां क्यू ना गेर दी कुऐं कै म्हां ठा कै।टेक

मिला रेत में लाड़ दिया री
बिना तेगे सिर बाढ़
होते हे जी क्यूं ना काढ़ दिया री, घिटी मैं गुंठा ला कै।