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अब आगे बसंत बहार / राम शरण शर्मा

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हो मोर लेढ़वा भैय्या, हो, मोर लेढ़वा दादू।
तय, गा देबे फाग मल्हार।
अब, आगे बसंत बहार ...

कहरत कहरत आमा मौंरंगे,
गमकत गमकत सौंप फूलगे।

पत्ता पत्ता फूल फूल से,
होगे पेड़ नवा सजधज के॥
सब, लगे दुलहिन कस आज -हो, मोर॥
पीऊ पीऊ कोइलिया बोलै,

चह चह गौरैया चहकारै।
पेड़ पेड़ म डार डार मं,
तरिया तरिया कमाल पान मं ॥
अब ढूंढय अपन अपन भरतार - हे मोर ॥

ताना बाना काम देव के,
ठऊर ठऊर ह बने सुहातथे।
बाग बगीचा ताल पोखरी,
मनके मनके मन ललचाथे ॥

देख अब, चलथे तीनों बयार – हो, मोर॥
संगी तोर मादर थपकादय,
वंशी के तान सही धरवादय।
झांझ, मंजीरा अउ झमकादै ।

संग नगाड़ा ल घुड़कादय
करवादय, वीना के झंकार – हो, मोर॥