भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला / सीमाब अकबराबादी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


अब क्या बताऊँ मैं तेरे मिलने से क्या मिला
इर्फ़ान-ए-ग़म[1] हुआ मुझे, दिल का पता मिला


जब दूर तक न कोई फ़कीर-आश्ना मिला,
तेरा नियाज़-मन्द [2]तेरे दर से जा मिला


मन्ज़िल मिली,मुराद[3] मिली मुद्द'आ[4] मिला,
सब कुछ मुझे मिला जो तेरा नक़्श-ए-पा [5] मिला


या ज़ख़्म-ए-दिल को चीर के सीने से फेंक दे,
या ऐतराफ़[6] कर कि निशान-ए-वफ़ा मिला

"सीमाब" को शगुफ़्ता[7] न देखा तमाम[8]उम्र,
कमबख़्त[9] जब मिला हमें कम-आश्ना मिला

शब्दार्थ
  1. ज्ञान
  2. विनीत, चाहने वाला
  3. इच्छा,चाह
  4. विषय
  5. पद-चिह्न
  6. स्वीकार कर
  7. आनंदित
  8. सारी
  9. अशुभ