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अरी क्यूं शोर कर्या म्हारे बाग में रो रो रूकके दे री / मेहर सिंह

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विश्वामित्र कांशी शहर की ओर चल पड़ते हैं शहर के बाहर जहां पर मदनावत पानी भर रही थी। जिसे देखकर विश्वामित्र आवाज लगाता है कि किसी का लड़का नोलखे बाग में मरा हुआ पड़ा है और उसके सिर पर काली टोपी है मदनावत उस को यह बात दोबारा बताने के लिए कहती है। विश्वामित्र उस को फिर बता देता है तो रानी बाग में जाकर रोहतास की लाश के पास बैठकर रुदन मचाती है तो बाग का माली उससे रोने का कारण पूछता है-

अरी क्यूं शोर कर्या म्हारे बाग में रो रो रूकके दे री।टेक

आड़े पक्षी तक भी मौन होगे बोलैं ना पपीहा मोर
काग कोयल एक जगह कट्ठे होगे डांगर ढोर
हाहाकार कर कै रोई इतणा क्यूं मचाया शोर
बड़े दुखां तै बेटा पाला के रूखां कै लागै लाल
न्यूं तै मैं भी जाणुं सुंरी खोटी हो सै मोह की झाल
जेठ केसी धूप पड़ै तूं गर्मी में होज्या काल
के लिख दी मुए भाग में के नाम पति का तूं ले री।

रूंख था यो छाया खातर टूट्या आंधी रेले में री
दिन धौली में डाका पड्ग्या लूट लई तूं मेले में री
बतावै कफन काभी तोड़ा ल्हास लहको ले केले में री
लाश उपर पड़कै नै क्यूं छाती पीट कै रौवै सै री
जब न्यौली मैं तै नकदी खूज्या फेर पाछै के होवै सैरी
पणमेशर सै देने आला दुनिया खेती बोवै सै री
कोए रौवै कोए राम में सै कर्मा की हथ फेरी।

बागां म्हां तै ल्हाश उठा ले ना तै ईकी रे रे माटी होगी
जब मालम पाटै तेरे धणी नै उसकी तबीयत खाटी होगी
पूत के मरे की सुण कै गात में उचाटी होगी
आड़ै तै तूं ल्हाश उठा ले सर्प गहण का होर्या सै री
मेरा भी जी कायल पावै तेरा तै यो छोरा सै री
जाकै ल्हाश नै फूंक न्यूं नै शमशाणां का गोरा सै री
उड़ै जाकै दे दे आग में अपर्ण बेटे की या ढेरी।

ईब इस नै के देखै सै री इस की नाड़ी छूट लई
पांचों तत्व न्यारे होगे दसों इन्द्री लूट लई
माटी कै म्हां माटी मिलगी हवा सांस छूट लई
मेरे आगै क्यूं रोवै सै आगै जा कै बेटा मांग
लखमीचन्द तै गौड़ बामण करणे तो सिखावै सांग
आज काहल के इसे गवैया कीड़ी की ना टूटै टांग
इन जाटां की पाग में सै जात मेहर सिंह तेरी।