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अलाव है दिमाग मेरा / अतुल कुमार मित्तल

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एक अलाव है दिमाग मेरा
गर्माना था इसे घर अपना
पर झुलसा रहा है इसे यह
इसकी गर्मी से विचारों
की ईंटें पिघल जाती हैं
सीसे सी
और फिर देश के कुशलतम
इंजीनियर आते हैं
मुआयना करने इस अलाव
का
और सुझाते हैं कि फिट
करवा दिया जाय इसमें
एक सेफ्टी वाल्व
यदि अलाव की उम्र दराज
करनी हो!

नहीं-नहीं चाहिए मुझे
सेफ्टी जैसा कोई वाल्व
अपने आप बनाएगा
खौलता लावा कोई राह
दिमाग की दीवारों में से
या फिर
फूट पड़ेगा एक दिन
ज्वालामुखी की शक्ल में
और
दुनिया को ऊर्जा का
दर्शन दे जायेगा!