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अवशेष / एज़रा पाउंड / एम० एस० पटेल

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वाह ! मेरे देश में कतिपय असहाय
हाय ! बाक़ी ग़ुलाम बने !
विरोध में उसके कलाकार मिट गए,
देहातों में भूले-भटके खो गए,
विरोध में अविश्वासी कह चुके हैं,

सौन्दर्य के उपासक भूखे हैं,
व्यवस्थाओं से निराश हैं,
सत्ता के विरोध में असहाय हैं,

सफलताओं पर अटल
कौन तुम्हें अशक्त नहीं कर सकता है
तुमसे बोल ही कौन सकता है,
जो तुम्हें बारम्बार दोहराने में फौलाद नहीं कर सकता है,

तुम प्रगल्भ हो,
मिथ्याज्ञान के विरोध में टूट चुके हो,
घृणित, अवरुद्ध, अविश्वासी;

सोचिए :
मैंने संकट झेला है,
मैंने निर्वासन विफल किया है ।

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : एम० एस० पटेल

लीजिए अब मूल अँग्रेज़ी में यही कविता पढ़िए
                Ezra Pound
                  The Rest

O helpless few in my country, remnant enslaved!

Artists broken against her,
A-stray, lost in the villages,
Mistrusted, spoken-against,

Lovers of beauty, starved,
Thwarted with systems,
Helpless against the control;

You who can not wear yourselves out
By persisting to successes,
You who can only speak,
Who can not steel yourselves into reiteration;

You of the finer sense,
Broken against false knowledge,
You who can know at first hand,
Hated, shut in, mistrusted :

Take thought:
I have weathered the storm,
I have beaten out my exile.