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अहसासों की यात्रा / रचना त्यागी 'आभा'

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अहसासों को तुम तक
पोटली में बाँधकर
लाने के जतन में
कई शब्द जो भारी थे,
कहीं पथ में ही गिर गये

और तुम तक पहुँचे
केवल हल्के शब्द
जताने हल्के अहसास ...
और तुम रह गये वंचित
मेरी सम्पूर्ण सम्प्रेषणा से,
सम्पूर्ण भावनाओं से...
और जाना केवल आधा हृदय।
प्रतिकृत भी किया
असम्पूर्ण तुमने,
ठीक उसी अनुपात में
जिसमें गिरे थे शब्द
और जिसमें पहुँचे तुम तक...