भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आँखें बन्द कर / ओक्ताविओ पाज़ / उज्ज्वल भट्टाचार्य

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आँखें बन्द कर
तुम प्रकाशित हो उठती हो
तुम अन्धा पत्थर हो

रात दर रात
मैं तुम्हें तराशता हूं
आँखें बन्द कर
तुम खालिस पत्थर हो

हम
बेशुमार हो चुके हैं
सिर्फ़ एक-दूसरे को
जानते हुए
आँखें बन्द कर

अँग्रेज़ी से अनुवाद : उज्ज्वल भट्टाचार्य