भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आं सांसां रो आणो-जाणो देखो / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आं सांसां रो आणो-जाणो देखो
कुण जाणै कठै है ठिकाणो देखो

दिनूगै तो मुळकै हो भोर सागै
अबै क्यूं हुयो औ रीसाणो देखो

आभै री बात आंख में अमूझगी
अबै पींजरै पड़्‌या दाणा देखो

हाल चाल पूछ्या तो बोल्यो इंयां
लो औ पड़्यो धुखतो छाणो देखो

घर फूंकणिया री जात नुंवी कठै
कबीर आळो सागी घरणो देखो