भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

आई है / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पहाडों का सीना चीर
रास्ते के हर पत्थर को
ठोकर मार
यहां तक
जब चली आई है नदी

तो अब क्यों न
हमीं आगे बढ़कर
बांहों में भींच लें इसे
हमीं से मिलने तो आई है यह !