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आज़ादी स्मारक दरअसल एक औरत है / गब्रियेला गुतीयरेज वायमुह्स / दुष्यन्त

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क्या आपने महसूस किया है कभी
दोहराव के जंग को।
वह औरत वो नहीं है

क्या कभी भौतिकता की सुन्दरता से चकित हुए हो !
वह औरत वह नहीं है

वह औरत के रोएँरहित पाँवों पर पड़ती
वो प्रताड़ित, टूटे हुए प्रकाशपुंज का रेजर नहीं है।

ना ही वह टाइसाइकिल जो नहीं दी गई है
और बाइसाइकिल को बीच तक ले जाया नहीं जाता

और तश्तरी कभी मुक्त नहीं होती
वह औरत कुण्ठा के अक्षमा भाव-सी नहीं है
डबल्यू० डबल्यू० आई० आई० कैम्प के जापानी आदमी के अन्धे उत्साह-सी भी नहीं है वह औरत।

पिकनिक की टोकरी बिना पेन्दे की

ख़ुशी से भरपूर वह औरत
वह बेचती है किताबें
जो घर भेजती है किताबें हर रोज़
कोर्ट के लिए कर्म के साथ।

वह औरत एक शोर करने वाली पैडल बोट है
जो बच्चो को अनन्त तक ले जाती है

वह पचास के दशक का बाग है
एक जापानी आदमी का लगाया हुआ
जब उसको आख़िरकार महसूस हुआ कि उसके ग्रीनहाउस मेंं है
उसका आने वाला कल।

ठीक इस आज़ादी की प्रतिमा के समान
वह औरत ले जाएगी तुम्हें उस जगह तक
जहाँ तुम कभी नहीं गए
अपने ही घर के भीतर।

वह कई तहज़ीबों में यक़ीन रखने वाली तस्वीर है
जिसके पेज हैं जातियाँ
और ग़ुलामी की ज़ुबान बोलकरे जीते तमगे हैं

झील जैसे दोस्त
पारदर्शिता से जो तुम्हें बेहतर बनाता है

वह यहाँ थी जब नारीवाद हिप्पी-सा था
बैंगनी तकिए थे सत्ताओं के ख़िलाफ़ निरन्तर।

वह औरत अब भी यहीं है
और नारीवाद उपस्थित है

बुद्धिज्म के उथले जल में तैर रहा है
एक अच्छे दिन
पोप के आलिंगन में
वह आज़ादी का इण्टरनेट है
जब कि वह है आज़ादी की प्रतिमा भी।

अँग्रेज़ी से अनुवाद — दुष्यन्त