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आजु सखी प्रातकाल / नारायण स्वामी

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आजु सखी प्रातकाल, दृग मींडत जगे लाल,
रूप के बिसाल सिंघु, गुनन के जहाज।
कुंडल सौं उरझि माल, मुख पै अलकन को जाल,
भई मैं निहाल निरखि, सोभा को समाज॥

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