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आज मिलकर खुली हवा में सांस तो लो / सांवर दइया

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आज मिलकर खुली हवा में सांस तो लो।
तिनका ही सही, जो भी हो, साथ तो लो।

सुना है इस बस्ती में आए फरिश्ते,
हम भी जानें, कौन हैं वे, नाम तो लो।

तहखानों में पूछें तो अब क्या कहें,
हां, हम देंगे बयान, सरे आम तो लो।

उनका पूरा इतिहास लिखा है इसमें,
फिर पढ़ लेना, अभी पर्चा थाम तो लो।

रात का रूप-पाश न रह सकेगा सदा,
निकलेगा सूरज, हिम्मत से काम तो लो।