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आज यह देख क्या हुआ, अखबार हो गए लोग / सांवर दइया

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आज यह देख क्या हुआ, अखबार हो गए लोग।
देखते ही देखते इशितयार हो गए लोग।

गया वह वक़्त जब जररूत थी सहारों की,
आज अपने ही पहरेदार हो गये लोग।

उनकी अफवाओं का असर अब क्या होगा,
देखो, खुद तक से खबरदार हो गये लोग।

हवा आयेगी, सोचकर खोल लीं खिडकियां,
उनको क्या मालूम गुबार हो गए लोग।

बहुत खुश थे, चलो बुझ गईं चिंगारियां,
राख के ढेर में फिर अंगार हो गए लोग।