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आड़ै डर डर कै मर ज्यांगी पिया देख कै घटा घन घोर नै / मेहर सिंह

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फौज मैं जाकै भूल मत जाईये अपणी प्रेमकौर नै
आड़ै डर डर कै मर ज्यांगी पिया देख कै घटा घन घोर नै।

तेरे बिना पिया इस घर मैं लागै घोर अन्धेरा
ग्राम बरोणे मैं तेरे बिना म्हारा होजया उजड़ डेरा
जैसे चन्दा बिना चकोरी सूनी न्यूं सूना घर मेरा
रही ठाण पै कूद बछेरी कित चाल्या गया बछेरा
मेरा फिका पड़ग्या चेहरा क्यूं लूटै मेरे त्यौर नै।

शाम सवेरी मनै अकेली नै खेतां कै म्हां जाणा हो
बदमाशां की टोली घूमैं मुश्किल गात बचाणा हो
नहीं मौत का कोए भरोसा घटज्या माल बिराणा हो
तेरी खातिर में रहूं जींवती जब लग पाणी दाणा हो
बिना मोरनी कूण नचावै इस रंग रंगीले मोर नै।

पतला गात बैत ज्यूं लरजै जणुं बाड़ी खिलरी जोर की
सूए बरगी नाक पिया की गर्दन मेरी मोर की
काली गऊ सूं पिया मैं देखुं बाट खोर की
होट गुलाबी चमकैं सैं जणुं बिजली घन घोर की
कठ पुतली की तरियां नाचूं जब तूं हिलावै डोर नै।

दर्जी पै सिमवाइये मेरा लेडी मैटर सूट पिया
पायां कै म्हां पहरादे उंची ऐडी के बूट पिया
दम दम कर कै चालूंगी जणुं कोए फौजी रंगरूट पिया
तेरे बिना क्यूंकर जीऊं भरूं सबर की घूंट पिया
मेहर सिंह तू भूल मत जाइये अपणी चित चोर नै।