भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आत्मा को ऐसे धोएँ / अद्रिआना लिस्बोआ / गीत चतुर्वेदी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आत्मा को
अपने हाथों से धोना चाहिए।

इसलिए नहीं कि
वह बहुत नाजुक होती है
और रगड़े जाने पर उसमें से ख़ून आ जाएगा।
 
इसके उलट,
वह बेहद मजबूत कपड़े से बनी होती है
और उसे साफ करने का एक ही तरीका है कि
उसे हाथों से धोया जाए।
 
एक घरेलू साबुन लें —
अच्छा होगा कि सबसे सस्ता वाला।

ब्लीच, फैब्रिक सॉफ्टनर —
ये सब भूल जाइए,
किसी आत्मा को इनकी ज़रूरत नहीं होती।
 
थोड़ी देर तक उसे भिगोकर रखिए
ताकि जिद्दी दाग हट जाएँ,
हट जाएँ तेल, कीचड़, चटनी-सॉस के निशान भी।

फिर उसे रगड़िए, निचोड़िए
और सूखने के लिए धूप में टांग दीजिए।
इस्तरी करने की कोई ज़रूरत ही नहीं है।
 
अगर इस तरह से धोएँगे,
तो आप बरसों बरस पहन सकते हैं अपनी आत्मा।
 
यह जो आपकी देह है न, यही दुनिया है —
यह एक अड़ियल स्कूल है

और आत्मा
इसका आदर्श यूनिफॉर्म।

अँग्रेज़ी से अनुवाद — गीत चतुर्वेदी