भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आप का आधा-सा कुछ वादा रहा / रवि सिन्हा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आप का आधा-सा कुछ वादा रहा
और मैं कुछ मुतमइन[1] ज़्यादा रहा

बज़्म में हर एक पे तेरी नज़र
और मैं बस तुझ पे आमादा रहा

अंजुमन[2] में तो हुआ था एहतिराम[3]
उम्र भर वो शख़्स उफ़्तादा[4] रहा

दामने-तहज़ीब पे धब्बे हैं यूँ
बारहा मैं महफ़िले-आदा[5] रहा

एक तू था और इक तेरा वज़ीर
मैं तुम्हारे खेल में प्यादा रहा

आप के आने के चर्चे शहर में
और मैं रस्ते में इस्तादा[6] रहा

रूह की चालाकियों के फ़लसफ़े
जिस्म का रद्दे-अमल[7] सादा रहा

शब्दार्थ
  1. आश्वस्त (Assured)
  2. सभा (Meeting, Gathering)
  3. सम्मान (Honour)
  4. दुखी (Miserable)
  5. दुश्मनों की सभा (Assembly of Enemies)
  6. खड़ा (Standing)
  7. प्रतिक्रिया (Response)