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आबो-गिल / रेशमा हिंगोरानी

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ये धुआँ धुआँ ये गुबार[1] क्यूँ
न है दिल को अपने क़रार क्यूँ

क्या वो आ बसे हैं यहीं कहीं
न उतर रहा ये ख़ुमार क्यूँ

मैं हूँ मुत्मईन[2] गमे-यार[3] से,
लूँ गमे-जहाँ[4] से उधार क्यूँ?

जो थमे न सिलसिला-ए-अलम[5]
न मस्सरतों[6] का शुमार[7] क्यूँ

तेरे बिन गुज़र तो मुहाल[8] हो,
तेरे साथ भी दुशवार[9] क्यूँ?

हुई आबो-गिल[10] में बसर न जब,
तो ज़मीं पे शम्मा, मज़ार[11] क्यूँ?

शब्दार्थ
  1. धूल, उलझन
  2. संतुष्ट
  3. महबूब का गम
  4. दुनिया के गम
  5. दर्द का सिलसिला
  6. खुशियों
  7. गिनती
  8. मुश्किल
  9. मुश्किल
  10. पानी और मिट्टी
  11. कब्र