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आयोनी / कंस्तांतिन कवाफ़ी / सुरेश सलिल

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कि हमने उनकी मूर्तियाँ तोड़ दीं
कि हमने उन्हें मन्दिरों से खदेड़ दिया
क़त्तई अर्थ नहीं इस सबका
कि वे देवता मर गए ।

ओ आयोनिया[1] की धरा,
वे अब भी तुमसे प्रेमानुरक्त हैं ।
उनकी आत्मा में अब भी तुम्हारी स्मृति है ।

जब अगस्त की कोई भोर तुम पर प्रकट होती है
तुम्हारा वायुमण्डल उनके जीवन से प्रभावित होता है

और कभी कभी
एक युवा सुकुमार आकृति अस्पष्ट
द्रुतगामी उड़ान में
तुम्हारी पहाड़ियों के आर-पार पँख पसारती है ।

[1911]

अँग्रेज़ी से अनुवाद : सुरेश सलिल

शब्दार्थ
  1. एशिया माइनर का एक क्षेत्र। इसी से जुड़कर दोनों महाद्वीपों में फैले उस देश का नाम यूनान [अँग्रेज़ी में ‘ग्रीस’] पड़ा। यूनानी संस्कृति अपने जिस रूप में विख्यात है, उसका जन्म यूरोपीय भूमि पर नहीं, एशियाई भूभाग आयोनिया में हुआ। महान कवि होमर, इतिहास का जनक हेरोदोतस आदि अनेक प्राचीन यूनानी व्यक्तित्व इसी आयोनिया क्षेत्र में हुए।