भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आयो बगत भूंडो भारी बाबा / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आयो बगत भूंडो भारी बाबा
किण नै फ़ुरसत सुणै थारी बाबा

आंगळी मेलां तो फ़ीसै गाभा
लागै कोनी कोई कारी बाबा

अळघै सूं दै झोला नित भरमावै
इण सुख मन में कांई धारी बाबा

मून री भींतां इंयां ई टूटैला
आ बंतळ रैवण दै जारी बाबा

हर उणियारै आसी ओप-उजास
उणी दिन हुसी जीत थारी बाबा