भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आराधना / शार्दुला नोगजा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

यों ही उस धार में बहे हम भी
जैसे पूजा के फूल बहते हैं,
मेरे हाथों में तेरा दामन है
मुझे तेरी तलाश कहते हैं।

तुझ को पा कर के क्या नहीं पाया
तुझ को खो कर के मैं अधूरी हूँ,
तू जहाँ बाग़ है वो ज़मीन हूँ मैं
तेरे होने में मैं ज़रूरी हूँ।

तू मुझे प्यार दे या ना देख मुझे
मेरी हर उड़ान तुझ तक है,
तेरी दुनिया है मंज़िल दर मंज़िल
मेरे दोनों जहान तुझ तक है।