भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आर्टिना के लिए / बालकृष्ण काबरा 'एतेश' / लैंग्स्टन ह्यूज़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मैं लूँगा तुम्हारा हृदय।
मैं लूँगा तुम्हारी आत्मा
तुम्हारी देह से बाहर
मानो हूँ मैं ईश्वर।

मैं नहीं होऊँगा सन्तुष्ट
तुम्हारे हाथों के स्पर्श से
न ही केवल तुम्हारे होठों की मधुरता से।

मैं लूँगा तुम्हारा हृदय अपने लिए।
मैं लूँगा तुम्हारी आत्मा।
जब बात तुम्हारी हो,
मैं होऊँगा ईश्वर।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : बालकृष्ण काबरा ’एतेश’