भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आह्वान / धीरेन्द्र अस्थाना

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तोड़ दो सपनों की दीवारें,
मत रोको सृजन के चरण को,
फैला दो विश्व के वितान पर,
मत टोको वर्जन के वरण को!

जाने कितनी आयेंगी मग में बाधाएँ,
कहीं तो इन बाधाओं का अंत होगा ही.
कौन सका है रोक राह प्रगति की,
प्रात रश्मियों के स्वागत का यत्न होगा ही!

प्रलय के विलय से न हो भीत,
तृण- तृण को सृजन से जुड़ने दो
नीड़ से निकले नभचर को
अभय अम्बर में उड़ने दो,

जला कर ज्योति पुंजों को,
हटा दो तम के आवरण को,
तोड़ दो सपनों की दीवारें,
मत रोको सृजन के चरण को!