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आ कुदरत मा ईं रो हेत देख तूं / सांवर दइया

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आ कुदरत मा ईं रो हेत देख तूं
माथै सूरज हेठै रेत देख तूं

आगै ऊभां री बात छोड़ दै अब
लारै कुण थारै समेत देख तूं

ईद खातर पाळ करै लाड सवाया
ऐ म्हांरा है आं रो हेत देख तूं

रूपाळा दीसै पण कीं नीं निपजै
बांझडी लुगाई-सा खेत देख तूं

अब कोई नीं चींथ सकै पगां तळै
राती चोळ हुई आ रेत देख तूं