भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इंतहा / रतन सिंह ढिल्लों

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

इंतहा के आगे
और इंतहा
मुझे इतना ना सता
मुझे और न रुला

तू पहले भी थी बे-वफ़ा
तू आज भी है बे-वफ़ा
मुझे मिल गई है मुहब्बत की सज़ा ।
 
मूल पंजाबी से अनुवाद : अर्जुन निराला