भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इतना रोये थे लिपट कर दरो दीवार से हम / मुनव्वर राना

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

इतना रोए थे लिपटकर दरो-दीवार से हम
शहर में आ के बहुत दिन रहे बीमार-से हम

अपने बिकने का बहुत दुख है हमें भी लेकिन
मुस्कुराते हुए मिलते हैँ ख़रीदार से हम

सुलह भी इससे हुई जंग में भी साथ रही
मुख़तलिफ़[1] काम लिया करने हैं तलवार से हम

संग[2]आते थे बहुत चारों तरफ़ से घर में
इसलिए डरते हैं अब शाख़े-समरदार[3] से हम

सायबाँ[4]हो तेरा आँचल हो कि छत हो लेकिन
बच नहीं सकते हैं रुस्वाई की बौछार से हम

शब्दार्थ
  1. विभिन्न
  2. पत्थर
  3. फलों वाली डाली
  4. छ्ज्जा