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इनकार / चेन्जेराई होव / राजेश चन्द्र

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पुलिस जब आ ही जाए ऐन सिर पर
और उसकी लाठी नृत्य करने लगे
तुम्हारी पीठ पर
इनकार कर देना झुकने से ।

बिच्छू जब आ ही जाएँ
और डंक मार दें चाहे
तुम्हारी आँखों और कानों पर
इनकार कर देना उनके वश में आने से ।

दुनिया जब घूमती नज़र आए गोल-गोल
यातना-कक्ष के भीतर
साफ़ इनकार कर देना चाहिए
तुम्हारे दिल को मुरझाने से ।

तुम सुनना बच्चों की आवाज़ों को
देखना रंगत हमारे संगीत की
और नाच उठना मन ही मन
समर्पण की मौत पर ।

जिस क्षण शक्तिसम्पन्न लोग
लूटने में लगे हों तमगे
और अशक्त चुन रहे हों
किनके शासन के
तुम इनकार कर देना घुटने टेकने से
फुटपाथ पर छल और कपट के ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : राजेश चन्द्र

अब यही कविता मूल अँग्रेज़ी में पढ़िए

         Chenjerai Hove
             REFUSE
when the police come
and their whip dances on your back
refuse to yield.

when the scorpions come
and sting your eyes and ears
refuse to comply.

when the world whirls round
in the torture chamber
refuse to let your heart wither.

hear the voices of children
see the colours of our music
and dance in the death of devotion.

when the powerful receive titles
and the weak take crumbs of power
refuse to kneel by the footpath of deceit.