भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इस इमली के ओड़े चोड़े पात / हरियाणवी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

इस इमली के ओड़े चोड़े पात
इमली तले साधण खड़ी
के म्हारी गोरी थमनै इमली की साध
के इमली तेरै मन बसी
ना राजा जी म्हारे इमली की साध
न इमली म्हारे मन बसी
हम नै तो म्हारा मारू प्यार की साध
आज रहो म्हारे महल में
पौ पाटी जद होई परभात
नाई कै नै दूब टांगिआ
के नाई का म्हारे जन्मी सै म्हैंस
के घोड़ी घुड़साल में
ना म्हारा जजमान जन्मी सै म्हैंस
ना घेड़ी घुड़साल मैं
थारे म्हारा जिजमान जनम्या सै पूत
बेल बधी थारे बाप की