भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

इस वेले कौण कौण जागे पुण करने दा वेला / पंजाबी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

इस वेले कौण कौण जागे पुण करने दा वेला,
इस वेले बाबल जागे पुण करने दा वेला,
बाबल पुण करे दान करे गंगा दा इसनान करे,
नाल लिआवे वरघर पुण कने दा वेला।
 
इस वेले कौण कौण जागे पुण करने दा वेला,
इस वेले भैया जागे पुण करने दा वेला,
भैया पुण करे दान करे गंगा दा इसनान करे,
नाल लिआवे दाजो पुण करने दा वेला।
 
इस वेले कौण कौण जागे पुण करने दा वेला,
इस वेले चाचा जागे पुण करने दा वेला,
चाचा पुण करे दान करे गंगा दा इसनान करे,
नाले लैआवे गुलियाँ पुण करें दा वेला।
 
इस वेले कौण कौण जागे पुण करने दा वेला,
इस वेले मामा जागे पुण करने दा वेला,
मामा पुण करे दान करे गंगा दा इसनान करे,
नाले लै आवे चूड़ा पुण करने दा वेला।