भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ईसुरी की फाग-15 / बुन्देली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

जब से रजऊ ने पैरी अंगिया, मोय करो बैरगिया

फिरतीं रातीं गली-खोरन में, तनक उगर गई जंगिया

घूमत फिरत नसा के मारे, मानो पी लई भंगिया

ईसुर भये बाग के भौंरा, रजऊ भईं फुलबगिया ।