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ईसुरी की फाग-9 / बुन्देली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

अब रित आई बसन्त बहारन, पान-फूल-फल डारन

हारन-हद्द-पहारन-पारन, धाम-धवल-जल-धारन

कपटी कुटिल कन्दरन छाई, गै बैराग बिगारन

चाहत हतीं प्रीत प्यारे की, हा-हा करत हजारन

जिनके कन्त अन्त घर से हैं, तिने देत दुख-दारुन

ईसुर मौर-झोंर के ऊपर, लगे भौंर गुंजारन ।