भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

उजड़ा शहर हमारा ऐसे / विजय किशोर मानव

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

उजड़ा शहर हमारा ऐसे
बहे गांव-घर सारा जैसे

फिर जीता कोई चुनाव, फिर
गांव दांव में हारा जैसे

कुहनी के बल चले आदमी
जल को मथे शिकारा जैसे

धुआं उठे, भीतर से सुलगे
आग कि हाल हमारा जैसे

होंठ सूखते, आंखें भरतीं
चलता यहा गुज़ारा जैसे