भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

उठ पआ जी मेरे दरद कालजे / पंजाबी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

उठ पआ जी मेरे दरद कलेजे
पा दओ नी मेरे माहीए वल चिठ्ठीआं
जा पहुंची चिट्ठी विच नि कचहरी
पढ़ लई नी माही पट्टां उत्ते धर के
छुट गईआं नि हत्थों कलमां दवातां
झुल पई नी हनेरी चार चुफेरे
तुर पआ नी जानी शिखर दुपहरे
आ गिया नी माही विच तबेले
आ माही साडी नब्ज़ जो फड़ लई
दस गोरिये कित्थे दरद कलेजे
मिट गया जी मेरे दरद कलेजे