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उदासी का महाकाव्य / निज़ार क़ब्बानी

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मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: निज़ार क़ब्बानी  » उदासी का महाकाव्य

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है दु:खी होना
दुख-- जिसकी मुझे तलाश थी सदियों से ।
मुझे तलाश थी
एक स्त्री की जो मुझे दुखी कर सके
जिसके बाहुपाश में
मैं एक गौरये-सा दुबक कर रोता रहूँ
मुझे तलाश थी एक स्त्री की
जो मेरी चिंदियों को बीन सके
वो जो बिखरी हैं टूटे क्रिस्टल के टुकड़ों की तरह

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दी हैं मुझे बुरी आदतें
मसलन इसने मुझे काफ़ी के कपों को
पढ़ना सिखला दिया है एक ही रात में हज़ारों-हज़ार बार
इसने मुझे सिखला दिए हैं कीमियागीरी के प्रयोगात्मक कार्य
इसी के कारण मैं अक्सर दौड़ लगाने लगा हूँ
भविष्य बाँचने वालों के ठौर- ठिकानों की ओर ।

इसने मुझे सिखला दिया है घर छोड़ भटकना
सड़क की पटरियों पर गहन आवारागर्दी करना
और बारिश की बूँदों
तथा कार की लाइट्स में
तुम्हारे चेहरे की तलाश का उपक्रम करना ।
अजनबियों के परिधानों में तुम्हारे पहनावे की पहचान करना
और यहाँ तक कि..
यहाँ तक कि...
विज्ञापन के पोस्टरों में भी तुम्हारी छवि की एक झलक-सी पा जाना ।

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है
यूँ ही भटकना बेमकसद-बेपरवाह
घंटों तक डोलना एक ऐसी बंजारन की खोज में
जो सौतिया डाह से भर देगी पूरी बंजारा औरत बिरादरी को
चेहरों और आवाज़ों के रेवड़ में
मैं कब से तलाशे जा रहा हूँ
एक चेहरा ..
एक आवाज़.. ।

मेरे भीतर धँस गया है तुम्हारा प्रेम
उदासी के नगर में
मैं पहले कभी दाख़िल नही हुआ हूँ अकेले
मुझे पता नहीं , फिर भी
अगर आँसू होते होंगे इंसान
तो उदासी के बिना
वे साधारण इंसानों की छाया-मात्र होते होंगे ..शायद..।

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है
एक बच्चे की तरह हरकतें करना
चाक से उकेरना तुम्हारा चेहरा -
दीवार पर
मछुआरों की नावों पर
चर्च की घंटियों पर
और न जाने कहाँ-कहाँ..
तुम्हारे प्रेम ने सिखला है
कि किस तरह प्रेम से बदला जा सकता है
समय का मानचित्र.... ।

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है
कि जब मैं प्रेम करता हूँ
थम जाती है पृथ्वी की परिक्रमा ।
तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया दिया है
हर चीज़ को विस्तार और विवरणों के साथ देखना
अब मैं पढ़ता हूँ बच्चों के लिए लिखी गईं
परियों की कथाओं वाली क़िताबें
और दाख़िल हो जाता हूँ जेन्नी के राजमहलों में
यह सपना पाले कि सुल्तान की बेटी मुझसे झट शादी कर लेगी
आह..वो आँखें....
लैगून के पानी से भी ज़्यादा शफ़्फ़ाक और पानीदार
आह ..वो होंठ..
अनार के फूल से भी ज़्यादा मादक और सम्मोहन से लबरेज़..
मैं सपने देखता हूँ कि एक योद्धा की तरह
उसका हरण कर लाऊँगा
सपने में यह भी देखता हूँ कि उसके गले में पहना रहा हूँ
मूँगों और मोतियों का हार ।
तुम्हारे प्रेम ने मुझे सिखला दिया है पाग़लपन
हाँ, इसी ने सिखला दिया है कि कैसे गुज़ार देना है जीवन
सुल्तान की बेटी के आगमन की प्रतीक्षा में।

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है
कि कैसे प्रेम करना है सब चीज़ों से
कि कैसे प्रेम को खोजना है सब चीज़ों में
जाड़े -पाले में ठिठुरते एक नग्न गाछ में
सूखी पीली पड़ गई पत्तियों में
बारिश में
अंधड़ में
उतरती हुई शाम के सानिध्य में
एक छोटे - से कैफ़े में पी गई
अपनी पसंदीदा काली काफ़ी में।

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है...शरण्य
शरण लेना होटलों में
बेनाम-बेपहचान
चर्चों में
बेनाम-बेपहचान
कॉफ़ीहाउसों में
बेनाम-बेपहचान।

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है
कि कैसे रात में अजनबियों के बीच
अचानक उपजती-उभरती उलाहना देती है उदासी
इसने मुझे सिखला दिया है
बेरूत को एक स्त्री की तरह देखना
एक ऐसी स्त्री
जिसके भीतर भरा है निरंकुश प्रलोभन
एक ऐसी स्त्री
जो हर शाम पहनती है अपनी सबसे ख़ूबसूरत पोशाक
और मछुआरों तथा राजपुत्रों को लुभाने के लिए
उभारों पर उलीचती है बेशकीमती परफ़्यूम।

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है रुलाई के बिना रोना
तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है
कि कैसे उदासी को आ जाती है नींद
रोश और हमरा की सड़कों पर
पाँव कटे, एक रोते हुए लड़के की तरह।

तुम्हारे प्रेम ने सिखला दिया है दुखी होना
दुख-- जिसकी मुझे तलाश थी सदियों से ।
मुझे तलाश थी
एक स्त्री की जो मुझे दुखी कर सके
जिसके बाहुपाश में
मैं एक गौरये-सा दुबक कर रोता रहूँ
मुझे तलाश थी एक स्त्री की
जो मेरी चिंदियों को बीन सके
वो जो बिखरी हैं टूटे क्रिस्टल के टुकड़ों की तरह ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह