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उदास हो बहती / कविता भट्ट

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1
बाँचो तो मन
नैनों की खिड़की से
पूर्ण प्रेम के
हस्ताक्षर कर दो
प्रथम पृष्ठ पर ।
2
रजनीगंधा
हो सुवासित तुम
अँधेरे में भी
तुम्हारे अस्तित्व से
जीवन संचार है ।
3
रजत -कण
बिखेरे मेरा मन
मुस्कानों के
प्रिय तेरे आँगन।
यों बरसा जीवन ।
4
तुम विवश
हो मेरी मुस्कान- सी
पुण्यसलिला
नहीं छोड़ती धर्म
उदास हो बहती।
5
लौटाने आया
जिसने ली उधार
धूप जाड़े में
कर रहा प्रचार
गर्मी की भरमार ।
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