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उसी में होकर एकसार / स्वाति मेलकानी

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अंधेरे रास्तों के पार
प्रकाश की जो तेज धार
बुला रही है बार-बार
उसी में होकर एकसार
मैं जल उठी हूँ रोम रोम
मैं बज उठी हूँ तार-तार