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उस लड़की का कोई प्रेमी नहीं था / पराग पावन

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उस लड़की का कोई प्रेमी नहीं था
यह कथा वाल्मीकि के जंगलों में
लिसोर के पेड़ों से
अब भी सुनी जा सकती है

वह लड़की बरसात को छूकर
गीला कर देना चाहती थी
चाँद को ताककर
ज़रा और चटक कर देना चाहती थी
पर उन्नीस बरसातों में पैर की उँगलियों को
सड़ने से बचा लेने का उपाय ही उसकी कमाई थी
और पूनमी चाँद से उसका हासिल, बस, इतना
कि अँजोरिया रात की लवनी[1]
दिन की लवनी से बहुत आरामदायक होती है

उस लड़की का कोई प्रेमी नहीं था
वह अरहर के लाल फूलों को हौले-से सहलाती
कई दफ़ा मछलियों को पकड़कर छोड़ देती
एक महीन मुस्कान घर लिए आती
जामुन के बूढ़े पेड़ों पर चढ़कर बैठी रहती
उतरती तो अपने जामुनी होठों पर उदास हो जाती
तिजहरियाँ फ़ुर्सत में पटिदारिन भाभियों से कनबतिया कर
ठठाकर हँस दिया करती थी वह लड़की
पर तबतक उस लड़की का कोई प्रेमी नहीं था

वह भटकने लगी थी भीतर-ही-भीतर
यद्यपि भटकना रास्तों का दिया हुआ
एक ख़तरनाक वरदान है
पर भटककर वाल्मीकि के जंगलों तक जा पहुँची
लड़की को इसका इल्म नहीं था

श्वेतवर्णी, बलिष्ठगाती, नयनाभिरामी एक धनुर्धारी में
झलकता-सा दिखा प्रेमी
लड़की ने सौंप दिया अपनी बरसातों को
जिन्हें छूकर गीला कर देना चाहती थी
उस पूनमी चाँद को
जिसे ताककर और चटक करना चाहती थी
अरहर के फूलों को
मछलियों को
जामुन के पेड़ों को
बेरोज़गार की अर्जी की तरह रख दिया
धनुर्धारी के सामने

पर लिसोर के पेड़ों की माने तो
धनुर्धारी ने चीथ दिया बरसातों को
लड़की के सीने से
मछलियों और जामुन के पेड़ों को
निगल गया धनुर्धारी का क्रोध
धनुर्धारी की आँखों की आग में भस्म हो गया
एक लड़की का साबुत मान

उसी बरस
विवाह में कूदकर मर गई वह लड़की
कई बरसों से विवाह में तैरती है लड़की की लाश
वक़्त के गिद्ध का ग्रास बनने तक
वह गंधाती रहेगी विवाह में

इस कथा-पाठ के अन्त-अन्त तक
उस लड़की का कोई प्रेमी नहीं था ।

शब्दार्थ
  1. गेहूँ की फ़सल काटने की मजूरी