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ऊंधो हुयोडो रूंख देख’र / सांवर दइया

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म्हारी जड़ां
जमीन में कित्ती ऊंडी है
आ चींतणियो रूंख
   आंधी रै थपेड़ां सूं
   ऊंधो हुयग्यो जमीन माथै

कित्ताक दिन रैवैला
तण्यो म्हारो डील-रूंख ?

नितूकी बाजै
अठै अभाव-आंधी
होळै-होळै कुतरै
     जड़ां नै जीव

अबै
औ गुमान बिरथा
म्हारी जड़ां
जमीन में कित्ती ऊंडी है !