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एक अजन्मे बच्चे की आवाज़ / मुइसेर येनिया

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मेरी आँखें बन्द हैं
अपनी देह के साथ
जो पी गई थी
अन्धकार की रोशनी
यहाँ मैं सो रही हूँ
बिना अपनी देह को जाने
जो एक साँप की तरह लहरा रही है

एक छाया है भीतर
एक मनुष्य है भीतर

भविष्य की स्मृतियाँ मेरे ज़ेहन में हैं

कोई आएगा
और ले चलेगा मुझे दुनिया में
उस असीम दुनिया में
उस ब्रह्माण्डीय ज़ख़्म में
उस ख़ुशनुमा समय में
जब शब्द चरवाहे हों
यहाँ हर नींद सुबह है
किसी की नज़र नहीं
इस यात्रा पर
जो स्वप्न के पारदर्शी मर्तबान के
भीतर जाती है
स्त्रियों के हृदय पर चिपके जड़ाऊ पिन की तरह
यहाँ मैं खड़ी हूँ
जैसे कोई स्त्री छोड़ गई हो मुझे
मैं सो रही हूँ

मेरे ज़ेहन में कोई विचार नहीं
न ही मेरा हृदय कुछ महसूस कर रहा है

मेरे कमरे की दीवारें मेरी दूसरी त्वचा है
जैसे मैं यहां हूँ बिना किसी पिता के

मैं खेलती हूँ
अपने खिलौने (ईश्वर) के साथ

मैं उनमे से एक हूँ जिसे आमन्त्रित किया गया है
इस दुनियांमें

कोख का यह तहख़ाना जहाँ मैं ठहरी हूँ
एक मर्तबान की तरह है
जो कह रहा है, जो कहना चाहिए
अपनी छायाओं के द्वारा

मैंने सुना है अभी बहुत वक़्त है मेरे पास
इस दुनिया में पहुँचने के लिए ।