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एक तो कोनी हरख रो अदीतवार अठै / सांवर दइया

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एक तो कोनी हरख रो अदीतवार अठै
ऊपर सूं आदमी नै दोलडी मार अठै

थारो-म्हारो बोझ उठावै कुण बोल बता
खुद री सांस तकात है अबै तो भार अठै

बैरी आछा लड़ै जणा सांमै तो आवै
अपणायत री आड़ भाई करै वार अठै

कद आवैला उणियारै ओप हरख हिवड़ै
जद देखां लाधै आंसुवां रो तिंवार अठै

कोई ‘गोदो’ कोनी आवै भाई म्हारा
चाल अठै सूं आपां बैठा बेकार अठै