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एक नई शुरूआत / मनीष मूंदड़ा

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तुम उठो
मुस्कुराओ
तुम रूठो
फिर से हँसो
कुछ बोलो
चलो, कुछ लिखो तुम फिर से गुस्सा हो लो
कुछ लिखो
कुछ देखो
कुछ सुन लो
कुछ पा लो
चलो, तुम फिर से ऐतराज कर लो
कुछ सुनलो
कुछ सुना दो
चलो, तुम फिर से अपने आप को संभाल लो
उठो अब
बहुत हुआ ये चुप रहना
चलो, तुम फिर से शुरुआत कर लो