भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

एक बार आओजी जवाईजी पावणा / राजस्थानी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

एक बार आओजी जवाईजी पावणा
थाने सासूजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना
सासूजी ने मालुम होवे म्हारे भाई आज होयो
म्हारे घरे से मौक्ळो काम सासूजी मने माफ़ करो...

एक बार आओजी जवाईजी पावणा...
थाने सुसराजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना
सुसराजी ने मालूम होवे बाप म्हारो सेहर गयो
म्हारे घर से लारलो काम
सुसराजी मने माफ़ करो

एक बार आओजी जवाईजी पावणा...
थाने साळीजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना
साळीजी ने मालुम होवे साढुजी ने भेजू हूँ
म्हारा साढुजी नाचेला सारी रात
साळीजी मने माफ़ करो

एक बार आओजी जवाईजी पावणा...
थाने बुवाजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना
बुवाजी ने मालुम होवे म्हारे भी बुवाजी आया
बुवासासुजी ने जोडू लंबा लंबा हाथ बुवाजी मने माफ़ करो

एक बार आओजी जवाईजी पावणा...
थाने लाडीजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना
लाडीजी बुलावे तो लाडोजी भी आवे है
मैं तो जाऊंला सासरिये आज साथिङा मने माफ़ करो

एक बार आओजी जवाईजी पावणा...
थाने सासूजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना....
थाने सुसराजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना...
थाने साळीजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना....
थाने बुवाजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना...
थाने लाडीजी बुलावे घर आज जवाई लाड्कना...