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एथेंस हवाई-अड्डा / महमूद दरवेश

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एथेंस हवाई-अड्डा छिटकाता है हमें दूसरे हवाई-अड्डों की तरफ़ ।
कहाँ लड़ सकता हूँ मैं ? पूछता है लड़ाकू ।
कहाँ पैदा करूँ मैं तुम्हारा बच्चा ? चिल्लाती है एक गर्भवती स्त्री ।
कहाँ लगा सकता हूँ मैं अपना पैसा ? सवाल करता है अफसर ।
यह मेरा काम नहीं, कहता है बुद्धिजीवी ।
कहाँ से आ रहे हो तुम ? कस्टम अधिकारी पूछता है ।
और हम जवाब देते हैं : समुन्दर से !
कहाँ जा रहे हो तुम ?
समुन्दर को, बताते हैं हम ।
तुम्हारा पता क्या है ?
हमारी टोली की एक औरत बोलती है : मेरी पीठ पर लदी यह गठरी ही है मेरा गाँव ।
सालों-साल इंतज़ार करते रहें हैं हम एथेंस हवाई-अड्डे पर।
एक नौजवान शादी करता है एक लड़की से, मगर उनके पास कोई जगह नहीं अपनी सुहागरात के लिए।
पूछता है वह : कहाँ प्यार करूँ मैं उससे ?
हँसते हुए हम कहते हैं : सही वक़्त नहीं है यह इस सवाल के लिए ।
विश्लेषक बताते हैं : वे मर गए ग़लती से
साहित्यिक आदमी का कहना है : हमारा खेमा उखड़ जाएगा ज़रूर ।
आख़िर चाहते क्या हैं वे हमसे ?
एथेंस हवाई-अड्डा स्वागत करता है मेहमानों का, हमेशा ।
फिर भी टर्मिनल की बेंचों की तरह हम इंतज़ार करते रहे हैं बेसब्री से
समुन्दर का ।
अभी और कितने साल ? कुछ बताओ एथेंस हवाई-अड्डे !

अंग्रेज़ी से अनुवाद : मनोज पटेल