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ए जी थांरा टाबर झुर-झुर रोवै म्हारी माय / तन सिंह

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ए जी थांरा टाबर झुर-झुर रोवै म्हारी माय
हालरियै हुलरावण तू कद आवैली ?
कूँपा इमरत रा कद ल्यासी म्हारी माय
थाक्याँ अडीक बेल बळ जावैली ।।
जलम दियां पछी सुध नहीं पूछी
ए जी हूँ तो रडतां रडतां हारयो म्हारी माय
म्हारो लाड लड़ावण तू कद आवैली ।।१।।

आभै पछट्यो म्हनै धरती न झाल्यो
ए जी हूँ तो कुओ छोड़ कठे जावूँ म्हारी माय
पारेबाँ री पांत अब तो उड़ जावैली ।।२।।

धर्म गयो रे म्हारी धरती लेग्या
ए जी अब तो पत राजपूती री जावै म्हारी माय
रमझोला झमकाती तू कद आवैली ।।३।।

आवै तो छोटो सो एक खांडो लाज्ये
ए जी म्हारे बख्तरियो लेती आए म्हारी माय
थारै तो छोरु री जान चढ़ जावैली ।।४।।

सरणाई साधार कहिजे तू
ए जी थारै वचना री प्रत पालो म्हारी माय
म्हारो शीश नामंता थारीं आँख लाजैली ।।५।।